अध्यक्ष की कलम से

Modified by admin on 16.02.2016

दूरसंचार क्षेत्र को देश में विकास और वृध्दि के एक प्रमुख प्रणेता के रूप में पहचान मिली है। आज, भारत का दूरसंचार नेटवर्क, लगभग 210 मिलियन टेलीफोनों के साथ विश्व के वृह्दतम नेटवर्कों में से एक है और यह एशिया की उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं में दूसरा बड़ा नेटवर्क है। हमनेर् व ा 2006-07 में 70 मिलियन टेलीफोन कनेक्शन प्रदान किए हैं जो कि 2005-06 में प्रदान किए गए कनेक्शनों से 66% अधिक हैं। अक्टूबर 2004 में ब्रॉडबैंड नीति की घो ाणा के बाद देश के 900 से अधिक शहरों में लगभग 2.5 मिलियन कनेक्शन प्रदान किए गए हैं।

भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में लगभग सभी मोरचों पर नाटकीय परिवर्तन हुए हैं। अब एकाधिकार का स्थान बहुप्रचालकों की प्रतिस्पध्र्दात्मक व्यवस्था ने ले लिया है, और प्रशुल्कों में भारी कटौती हुई है (लंबी दूरी की सेवा के लिए 30- रुपए प्रतिमिनट से 1- रुपए प्रति मिनट तक (वन-इंडिया प्लान)। निजी क्षेत्र का हिस्सा बढक़र 66% से अधिक हो गया है और मोबाइल टेलीफोनी का अंश 80% तक हो गया है।

दूरसंचार क्षेत्र के कार्य की व्यापक रूप से प्रशंसा हुई है परंतु, हमें विकसित देशों के स्तर तक पहुंचने के लिए अभी काफी प्रयास करने होंगे। इसलिए हमने 2010 के अंत तक 500 मिलियन टेलीफोन कनेक्शन देने और 20 मिलियन टेलीफोन उपभोक्ताओं को ब्रॉडबैंड कनेक्शन प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। सार्वभौमिक सेवा दायित्व निधि की सहायता से 1685 वाणिज्यिक रूप से अव्यवहार्य एसडीसीए में 13 लाख से भी अधिक ग्रामीण सीधी एक्सचेंज लाइनें प्रदान की गई हैं।

हम बड़ी तेज़ गति से विस्तार कर रहे हैं और साथ ही साथ हम सेवा का विश्व स्तरीय स्तर प्रदान करने के सभी संभव प्रयास भी कर रहे हैं। ट्राई सभी प्रचालकों के लिए सेवा के स्तर की नियमित रूप से निगरानी कर रहा है। मोबाइल नेटवर्क में भीड़-भाड़ को कम करने के लिए मोबाइल सेवा के उपयोग हेतु अतिरिक्त स्पेक्ट्रम का आबंटन भी करवाया जा रहा है।

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